राग : रामकली
पिय संग रंग भरि करि किलोलें ।
सबन कों सुख देन पिय संग करत सेन,
चित्त में परत चेन जब हीं बोलें ॥१॥
अति हि विख्यात सब बात इनके हाथ,
नाम लेत कृपा करें अतोलें ।
दरस करि परस करि ध्यान हिय में धरें,
सदा ब्रजनाथ इन संग डोलें ॥२॥
अतिहि सुख करन दुख सबके हरन,
एही लीनो परन दे झकोले ।
ऐसी यमुने जान तुम करो गुनगान,
रसिक प्रियतम पाये नग अमोले ॥३॥
Showing posts with label श्रीयमुनाजी के ४१ पद. Show all posts
Showing posts with label श्रीयमुनाजी के ४१ पद. Show all posts
Wednesday, June 6, 2007
२) श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके
राग : रामकली
श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके ।
निशदिना प्राणपति आय हिय में बसे,
जोई गावे सुजश भाग्य तिनके ॥१॥
येही जग में सार कहत बारंबार,
सबन के आधार धन निर्धन के ।
लेत श्री यमुने नाम देत अभय पद दान,
रसिक प्रीतम प्रिया बसजु इनके ॥२॥
श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके ।
निशदिना प्राणपति आय हिय में बसे,
जोई गावे सुजश भाग्य तिनके ॥१॥
येही जग में सार कहत बारंबार,
सबन के आधार धन निर्धन के ।
लेत श्री यमुने नाम देत अभय पद दान,
रसिक प्रीतम प्रिया बसजु इनके ॥२॥
३) कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें....
राग : रामकली
कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें ।
इन बिना कौन ऐसी करे हे सखी,
हरत दुख द्वन्द सुखकंद बरखें ॥१॥
ब्रह्मसंबंध जब होत या जीव को,
तबहि इनकी भुजा वाम फरकें ।
दौरिकरि सौरकर जाय पियसों कहे,
अतिहि आनंद मन में जु हरखें ॥२॥
नाम निर्मोल नगले कोउ ना सके,
भक्त राखत हिये हार करिकें ।
रसिक प्रीतम जु की होत जा पर कृपा,
सोइ श्री यमुना जी को रूप परखें ॥३॥
कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें ।
इन बिना कौन ऐसी करे हे सखी,
हरत दुख द्वन्द सुखकंद बरखें ॥१॥
ब्रह्मसंबंध जब होत या जीव को,
तबहि इनकी भुजा वाम फरकें ।
दौरिकरि सौरकर जाय पियसों कहे,
अतिहि आनंद मन में जु हरखें ॥२॥
नाम निर्मोल नगले कोउ ना सके,
भक्त राखत हिये हार करिकें ।
रसिक प्रीतम जु की होत जा पर कृपा,
सोइ श्री यमुना जी को रूप परखें ॥३॥
४) नैन भरि देखि अब भानु तनया....
राग : रामकली
नैन भरि देखि अब भानु तनया ।
केलि पिय सों करें भ्रमर तबहि परें,
श्रम जल भरत आनंद मनया ॥१॥
चलत टेढी होय लेत पिय को मोहि,
इन बिना रहत नहिं एक छिनया ।
रसिक प्रीतम रास करत श्री यमुना पास,
मानो निर्धनन की है जु धनया ॥२॥
नैन भरि देखि अब भानु तनया ।
केलि पिय सों करें भ्रमर तबहि परें,
श्रम जल भरत आनंद मनया ॥१॥
चलत टेढी होय लेत पिय को मोहि,
इन बिना रहत नहिं एक छिनया ।
रसिक प्रीतम रास करत श्री यमुना पास,
मानो निर्धनन की है जु धनया ॥२॥
५) श्याम संग श्याम, बह रही श्री यमुने....
राग : बिलावल
श्याम संग श्याम, बह रही श्री यमुने ।
सुरत श्रम बिंदु तें, सिंधु सी बहि चली,
मानो आतुर अलि रही न भवने ॥१॥
कोटि कामहि वारों, रूप नैनन निहारो,
लाल गिरिधरन संग करत रमने ।
हरखि गोविन्द प्रभु, निरखि इनकी ओर,
मानों नव दुलहनीं आइ गवने ॥२॥
श्याम संग श्याम, बह रही श्री यमुने ।
सुरत श्रम बिंदु तें, सिंधु सी बहि चली,
मानो आतुर अलि रही न भवने ॥१॥
कोटि कामहि वारों, रूप नैनन निहारो,
लाल गिरिधरन संग करत रमने ।
हरखि गोविन्द प्रभु, निरखि इनकी ओर,
मानों नव दुलहनीं आइ गवने ॥२॥
६) श्री यमुना सी नाही कोउ और दाता....
राग : बिलावल
श्री यमुना सी नाही कोउ और दाता ।
जो इनकी शरण जात है दौरि के,
ताहि को तीहिं छिनु कर सनाथा ॥१॥
एहि गुन गान रसखान रसना एक ,
सहस्त्र रसना क्यों न दइ विधाता ।
गोविन्द प्रभु तन मन धन वारने,
सबहि को जीवन इनही के जु हाथा ॥२॥
श्री यमुना सी नाही कोउ और दाता ।
जो इनकी शरण जात है दौरि के,
ताहि को तीहिं छिनु कर सनाथा ॥१॥
एहि गुन गान रसखान रसना एक ,
सहस्त्र रसना क्यों न दइ विधाता ।
गोविन्द प्रभु तन मन धन वारने,
सबहि को जीवन इनही के जु हाथा ॥२॥
७) श्री यमुना जस जगत में जोइ गावे...
राग : बिलावल
श्री यमुना जस जगत में जोइ गावे ।
ताके अधीन ह्वै रहत हे प्राणपति
नैन अरु बेन में रस जु छावे ॥१॥
वेद पुराण की बात यह अगम हे,
प्रेम को भेद कोऊ न पावे ।
कहत गोविन्द श्री यमुने की जापर कृपा,
सोइ श्री वल्लभ कुल शरण आवे
श्री यमुना जस जगत में जोइ गावे ।
ताके अधीन ह्वै रहत हे प्राणपति
नैन अरु बेन में रस जु छावे ॥१॥
वेद पुराण की बात यह अगम हे,
प्रेम को भेद कोऊ न पावे ।
कहत गोविन्द श्री यमुने की जापर कृपा,
सोइ श्री वल्लभ कुल शरण आवे
८) चरण पंकज रेणु श्री यमुने जु देनी.....
राग : बिलावल
चरण पंकज रेणु श्री यमुने जु देनी ।
कलयुग जीव उद्धारण कारण,
काटत पाप अब धार पेनी ॥१॥
प्राणपति प्राणसुत आये भक्तन हित,
सकल सुख की तुम हो जु श्रेनी ।
गोविन्द प्रभु बिना रहत नहिं एक छिनु,
अतिहि आतुर चंचल जु नैनी ॥२॥
चरण पंकज रेणु श्री यमुने जु देनी ।
कलयुग जीव उद्धारण कारण,
काटत पाप अब धार पेनी ॥१॥
प्राणपति प्राणसुत आये भक्तन हित,
सकल सुख की तुम हो जु श्रेनी ।
गोविन्द प्रभु बिना रहत नहिं एक छिनु,
अतिहि आतुर चंचल जु नैनी ॥२॥
९) धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे....
राग : मालकोंस
धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे ।
ताकी महिमा अब कहां लग वरनिये,
जाय परसत अंग प्रेम नीरे ॥१॥
निश दिना केलि करत मनमोहन,
पिया संग भक्तन की हे जु भीरे ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल,
इन बिना नेंक नहिं धरत धीरे ॥२॥
धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे ।
ताकी महिमा अब कहां लग वरनिये,
जाय परसत अंग प्रेम नीरे ॥१॥
निश दिना केलि करत मनमोहन,
पिया संग भक्तन की हे जु भीरे ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल,
इन बिना नेंक नहिं धरत धीरे ॥२॥
१०) जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे....
राग : मालकोंस
जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे ।
तापर कृपा करत श्री वल्लभ प्रभु,
सोई श्री यमुना जी को भेद पावे ॥१॥
तन मन धन सब लाल गिरिधरन को देकें,
चरन जब चित्त लावे ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल,
नैनन प्रकट लीला दिखावे ॥२॥
जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे ।
तापर कृपा करत श्री वल्लभ प्रभु,
सोई श्री यमुना जी को भेद पावे ॥१॥
तन मन धन सब लाल गिरिधरन को देकें,
चरन जब चित्त लावे ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल,
नैनन प्रकट लीला दिखावे ॥२॥
११) धन्य श्री यमुने निधि देनहारी....
राग : मालकोंस
धन्य श्री यमुने निधि देनहारी ।
करत गुणगान अज्ञान अध दूरि करि,
जाय मिलवत पिय प्राणप्यारी ॥१॥
जिन कोउ सन्देह करो बात चित्त में धरो,
पुष्टिपथ अनुसरो सुखजु कारी ।
प्रेम के पुंज में रासरस कुंज में,
ताही राखत रसरंग भारी ॥२॥
श्री यमुने अरु प्राणपति प्राण अरु प्राणसुत,
चहुजन जीव पर दया विचारी ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल
प्रीत के लिये अब संग धारी ॥३॥
धन्य श्री यमुने निधि देनहारी ।
करत गुणगान अज्ञान अध दूरि करि,
जाय मिलवत पिय प्राणप्यारी ॥१॥
जिन कोउ सन्देह करो बात चित्त में धरो,
पुष्टिपथ अनुसरो सुखजु कारी ।
प्रेम के पुंज में रासरस कुंज में,
ताही राखत रसरंग भारी ॥२॥
श्री यमुने अरु प्राणपति प्राण अरु प्राणसुत,
चहुजन जीव पर दया विचारी ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल
प्रीत के लिये अब संग धारी ॥३॥
१२) गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये.....
राग : मालकोंस
गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये ।
तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को
लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥
परम पुनीत प्रीति की रीति सब जानिके
दृढकरि चरण कमल जु गहिये ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल ,
ऐसी निधि छांडि अब कहाँ जु जैये ॥२॥
गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये ।
तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को
लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥
परम पुनीत प्रीति की रीति सब जानिके
दृढकरि चरण कमल जु गहिये ।
छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल ,
ऐसी निधि छांडि अब कहाँ जु जैये ॥२॥
Tuesday, June 5, 2007
१३) चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो...
राग: ललित
चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो ।
भक्त के वश कृपा करत हें सर्वदा,
ऐसो श्री यमुना जी को हे जु साखो ॥१॥
जा मुख ते श्री यमुने यह नाम आवे,
संग कीजे अब जाय ताको ।
चतुर्भुजदास अब कहत हैं सबन सों,
तातें श्री यमुने यमुने जु भाखो ॥२॥
चित्त में श्री यमुना, निशिदिन जु राखो ।
भक्त के वश कृपा करत हें सर्वदा,
ऐसो श्री यमुना जी को हे जु साखो ॥१॥
जा मुख ते श्री यमुने यह नाम आवे,
संग कीजे अब जाय ताको ।
चतुर्भुजदास अब कहत हैं सबन सों,
तातें श्री यमुने यमुने जु भाखो ॥२॥
१४) प्राणपति विहरत श्री यमुना कूले..
राग: ललित
प्राणपति विहरत श्री यमुना कूले ।
लुब्ध मकरंद के भ्रमर ज्यों बस भये,
देखि रवि उदय मानो कमल फूले ॥१॥
करत गुंजार मुरली जु ले सांवरो,
सुनत ब्रजवधू तन सुधि जु भूले ।
चतुर्भुज दास श्री यमुने प्रेमसिंधु में,
लाल गिरिधरनवर हरखि झूले ॥२॥
प्राणपति विहरत श्री यमुना कूले ।
लुब्ध मकरंद के भ्रमर ज्यों बस भये,
देखि रवि उदय मानो कमल फूले ॥१॥
करत गुंजार मुरली जु ले सांवरो,
सुनत ब्रजवधू तन सुधि जु भूले ।
चतुर्भुज दास श्री यमुने प्रेमसिंधु में,
लाल गिरिधरनवर हरखि झूले ॥२॥
१५) वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे...
राग : ललित
वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे ।
एहि रसनातें भजो नामरस अमृत,
भाग्य जाके हैं सोई जु पीजे ॥१॥
भानु तनया दया अति ही करुणामया,
इनहीं की कर आस अब सदाई जीजे ।
चतुर्भुजदास कहे सोई प्रभु पास रहे
जोइ श्री यमुनाजी के रस जु भीजे ॥२॥
वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे ।
एहि रसनातें भजो नामरस अमृत,
भाग्य जाके हैं सोई जु पीजे ॥१॥
भानु तनया दया अति ही करुणामया,
इनहीं की कर आस अब सदाई जीजे ।
चतुर्भुजदास कहे सोई प्रभु पास रहे
जोइ श्री यमुनाजी के रस जु भीजे ॥२॥
१६) हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे...
राग: ललित
हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे ।
जहाँ निसवासर रास में रसिकवर,
कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥
थकित सरिता नीर थकित ब्रजबधू भीर,
कोउ न धरत धीर मुरली सुनीजे ।
चतुर्भुजदास यमुने पंकज जानि,
मधुप की नामी चित्त लाय गुंजे ॥२॥
हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे ।
जहाँ निसवासर रास में रसिकवर,
कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥
थकित सरिता नीर थकित ब्रजबधू भीर,
कोउ न धरत धीर मुरली सुनीजे ।
चतुर्भुजदास यमुने पंकज जानि,
मधुप की नामी चित्त लाय गुंजे ॥२॥
१७) भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी...
राग: आसावरी
भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी ।
छांडि निजधाम विश्राम भूतल कियो,
प्रकट लीला दिखाई जु तैसी ॥१॥
परम परमारथ करत है सबन कों ,
देत अद्भुतरूप आप जैसी ।
नंददास यों जानि दृढ करि चरण गहे,
एक रसना कहा कहो विसेषी ॥२॥
भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी ।
छांडि निजधाम विश्राम भूतल कियो,
प्रकट लीला दिखाई जु तैसी ॥१॥
परम परमारथ करत है सबन कों ,
देत अद्भुतरूप आप जैसी ।
नंददास यों जानि दृढ करि चरण गहे,
एक रसना कहा कहो विसेषी ॥२॥
१८) नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई...
राग : आसावरी
नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई ।
भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके,
तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥
जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी,
तैसी ही आय साधजु पुजाई ।
नंददास प्रभु तापर रीझि रहे
जोई श्री यमुनाजी को जस जु गाई ॥२॥
नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई ।
भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके,
तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥
जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी,
तैसी ही आय साधजु पुजाई ।
नंददास प्रभु तापर रीझि रहे
जोई श्री यमुनाजी को जस जु गाई ॥२॥
१९) ताते श्री यमुने यमुने जु गावो...
राग: आसावरी
ताते श्री यमुने यमुने जु गावो ।
शेष सहस्त्र मुख निशदिन गावत,
पार नहि पावत ताहि पावो ॥१॥
सकल सुख देनहार, तातें करो उच्चार,
कहत हो बारम्बार जिन भुलावो ।
नंददास की आस श्री यमुने पूरन करी,
तातें घरी घरी चित्त लावि ॥२॥
ताते श्री यमुने यमुने जु गावो ।
शेष सहस्त्र मुख निशदिन गावत,
पार नहि पावत ताहि पावो ॥१॥
सकल सुख देनहार, तातें करो उच्चार,
कहत हो बारम्बार जिन भुलावो ।
नंददास की आस श्री यमुने पूरन करी,
तातें घरी घरी चित्त लावि ॥२॥
२०) भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई...
राग: आसावरी
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई ।
बात लौकिक तजो, पुष्टि श्री यमुने भजो,
लाल गिरिधरन वर तब मिलेई ॥१॥
भगवदीय संग कर बात इनकी लहें,
सदा सानिध्य रहें केलि मेई ।
नंददास जापर कृपा श्रीवल्लभ करें,
ताकें श्री यमुने सदाबस जु होई ॥२॥
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई ।
बात लौकिक तजो, पुष्टि श्री यमुने भजो,
लाल गिरिधरन वर तब मिलेई ॥१॥
भगवदीय संग कर बात इनकी लहें,
सदा सानिध्य रहें केलि मेई ।
नंददास जापर कृपा श्रीवल्लभ करें,
ताकें श्री यमुने सदाबस जु होई ॥२॥
Subscribe to:
Posts (Atom)