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Friday, September 7, 2007

सब मिल आवो, गाओ बजाओ.....

राग : भैरव

सब मिल आवो, गाओ बजाओ।
कनकथाल भर भर मुक्ता फल,
न्योछावर ले कराओ॥१॥

नव नव पल्लव बंधनमाल,
द्वार द्वार बंधावन आनंदघन।
प्रभु जन्म सुनतहि,
लाग्यों सुजस सुहावन॥२॥

Friday, May 11, 2007

प्रात: समय श्री वल्लभसुतको...

राग : भैरव

प्रात: समय श्री वल्लभसुतको, उठतही रसना लीजे नाम ।
आनंद्कारी प्रभु मंगलकारी , अशुभहरण जन पूरण काम ॥१॥

याहि लोक परलोकके बंधु , को कही सकत तिहारे गुणगान ।
नंददास प्रभु रसिक शिरोमणि, राज करो श्री गोकुल सुखधाम ॥२॥