राग : सारंग
पवित्रा पहरे को दिन आयो।
केसर कुमकुम रसरंग,
वागो कुंदन हार बनायो॥१॥
जय जयकार होत वसुधा पर,
सुर मुनि मंगल गायो।
पतित पवित्र किये सुख सागर,
सूरदास यश गायो॥२॥
Showing posts with label पवित्रा के पद. Show all posts
Showing posts with label पवित्रा के पद. Show all posts
Sunday, August 26, 2007
पवित्रा पहरे परमानंद....
राग : सारंग
पवित्रा पहरे परमानंद।
श्रावन सुदी एकादशी के दिन,
गिरिधर परमानंद॥१॥
श्री वृषभाननंदिनी निजकर,
ग्रथित विविध पटभांत।
ता मध्य सुभग सुवर्ण सुत्रसो,
पोई नवमती जात॥२॥
पवित्रा पहरे हिंडोरे जुलत,
दोउ आनंद कंद।
जमुना पुलिनमें कुंज मनोहर,
गावत परमानंद॥३॥
पवित्रा पहरे परमानंद।
श्रावन सुदी एकादशी के दिन,
गिरिधर परमानंद॥१॥
श्री वृषभाननंदिनी निजकर,
ग्रथित विविध पटभांत।
ता मध्य सुभग सुवर्ण सुत्रसो,
पोई नवमती जात॥२॥
पवित्रा पहरे हिंडोरे जुलत,
दोउ आनंद कंद।
जमुना पुलिनमें कुंज मनोहर,
गावत परमानंद॥३॥
Labels:
परमानंददासजी,
पवित्रा के पद,
राग सारंग,
हिंडोरा के पद
Subscribe to:
Posts (Atom)