राग : पूर्वी
छोटोसो कन्हैया एक, मुरली मधुर छोटी,
छोटे छोटे ग्वाल बाल छोटी पाघ सिरकी।
छोटेसे कुंडल कान, मुनीन के छूटे ध्यान,
छूटे पट छूटी लट अलकनकी॥१॥
छोटीसी लकुट हाथ,
छोटे दास बच्छ लिए साथ,
छोटेसे बनेरी कान्ह,
गोपी देखन आई घरघरकी।
नंददास प्रभु छोटे, भेदभाव मोटे मोटे,
खायो है माखन शोभा देखो ये बदन की॥२॥
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Saturday, September 15, 2007
Tuesday, June 5, 2007
१७) भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी...
राग: आसावरी
भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी ।
छांडि निजधाम विश्राम भूतल कियो,
प्रकट लीला दिखाई जु तैसी ॥१॥
परम परमारथ करत है सबन कों ,
देत अद्भुतरूप आप जैसी ।
नंददास यों जानि दृढ करि चरण गहे,
एक रसना कहा कहो विसेषी ॥२॥
भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी ।
छांडि निजधाम विश्राम भूतल कियो,
प्रकट लीला दिखाई जु तैसी ॥१॥
परम परमारथ करत है सबन कों ,
देत अद्भुतरूप आप जैसी ।
नंददास यों जानि दृढ करि चरण गहे,
एक रसना कहा कहो विसेषी ॥२॥
१८) नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई...
राग : आसावरी
नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई ।
भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके,
तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥
जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी,
तैसी ही आय साधजु पुजाई ।
नंददास प्रभु तापर रीझि रहे
जोई श्री यमुनाजी को जस जु गाई ॥२॥
नेह कारन श्री यमुने प्रथम आई ।
भक्त के चित्त की वृत्ति सब जानके,
तहांते अतिहि आतुर जु धाई ॥१॥
जाके मन जैसी इच्छा हती ताहिकी,
तैसी ही आय साधजु पुजाई ।
नंददास प्रभु तापर रीझि रहे
जोई श्री यमुनाजी को जस जु गाई ॥२॥
१९) ताते श्री यमुने यमुने जु गावो...
राग: आसावरी
ताते श्री यमुने यमुने जु गावो ।
शेष सहस्त्र मुख निशदिन गावत,
पार नहि पावत ताहि पावो ॥१॥
सकल सुख देनहार, तातें करो उच्चार,
कहत हो बारम्बार जिन भुलावो ।
नंददास की आस श्री यमुने पूरन करी,
तातें घरी घरी चित्त लावि ॥२॥
ताते श्री यमुने यमुने जु गावो ।
शेष सहस्त्र मुख निशदिन गावत,
पार नहि पावत ताहि पावो ॥१॥
सकल सुख देनहार, तातें करो उच्चार,
कहत हो बारम्बार जिन भुलावो ।
नंददास की आस श्री यमुने पूरन करी,
तातें घरी घरी चित्त लावि ॥२॥
२०) भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई...
राग: आसावरी
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई ।
बात लौकिक तजो, पुष्टि श्री यमुने भजो,
लाल गिरिधरन वर तब मिलेई ॥१॥
भगवदीय संग कर बात इनकी लहें,
सदा सानिध्य रहें केलि मेई ।
नंददास जापर कृपा श्रीवल्लभ करें,
ताकें श्री यमुने सदाबस जु होई ॥२॥
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई ।
बात लौकिक तजो, पुष्टि श्री यमुने भजो,
लाल गिरिधरन वर तब मिलेई ॥१॥
भगवदीय संग कर बात इनकी लहें,
सदा सानिध्य रहें केलि मेई ।
नंददास जापर कृपा श्रीवल्लभ करें,
ताकें श्री यमुने सदाबस जु होई ॥२॥
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