राग : बिहाग
गोवर्धनकी रहिए तर्हेती श्री गोवर्धनकी रहिए तर्हेती ।
नित्यप्रति मदनगोपाललाल की, चरणकमल चित्त लैय्ये ॥१॥
तन पुलकित व्रजरज में लोटत, गोविन्द्कुंडमें न्हैय्ये ।
रसिकप्रितम हित चित्त की बातें श्री गिरिधारीजू सो कहिये ॥२॥
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Friday, May 11, 2007
एक पलक जो रहिये वृंदावन.....
राग : बिहाग
एक पलक जो रहिये वृंदावन।
जन्म जन्म के पाप कटत हे कृष्ण कृष्ण मुख कहिये ॥१॥
महाप्रसाद और जल यमुना कि तनक तनक भर लइये।
सूरदास वैकुंठ मधुपुरी भाग्य बिना कहां पइये ॥२॥
एक पलक जो रहिये वृंदावन।
जन्म जन्म के पाप कटत हे कृष्ण कृष्ण मुख कहिये ॥१॥
महाप्रसाद और जल यमुना कि तनक तनक भर लइये।
सूरदास वैकुंठ मधुपुरी भाग्य बिना कहां पइये ॥२॥
दृढ इन चरण कैरो भरोसो...
राग : बिहाग
दृढ इन चरण कैरो भरोसो, दृढ इन चरणन कैरो
श्री वल्लभ नख चंद्र छ्टा बिन, सब जग माही अंधेरो । भरोसो…
साधन और नही या कलि में, जासों होत निवेरो । भरोसो….
सूर कहा कहे, विविध आंधरो, बिना मोल को चेरो । भरोसो……
दृढ इन चरण कैरो भरोसो, दृढ इन चरणन कैरो
श्री वल्लभ नख चंद्र छ्टा बिन, सब जग माही अंधेरो । भरोसो…
साधन और नही या कलि में, जासों होत निवेरो । भरोसो….
सूर कहा कहे, विविध आंधरो, बिना मोल को चेरो । भरोसो……
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