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Sunday, April 6, 2008

फूल भवन में गिरिधर बैठे फूलन को शोभीत सिंगार....

राग : कान्हरो

फूल भवन में गिरिधर बैठे फूलन को शोभीत सिंगार।

फूलन को कटी बन्यो पिछोरा फूलन बांधे पेंच संवार ॥

फूलनकी बेनी जू बनी सीर फूलन के जू बने सब हार ।

फूलन के मुक्त छबी छाजत फूलन लटकन सरस संवार ॥

करन फूल फूलन कर पॉहोची गेंद फूल जल करत विहार ।

राधा माधो हसत परस्पर दास निरखत डारत तन वार ॥