राग : मल्हार
बादर झूम झूम बरसन लागे।
दामिनि दमकते, चोंक चमक श्याम,
घन की गरज सुन जागे ॥१॥
गोपी जन द्वारे, ठाडे नारी नर,
भींजत मुख देखन कारन अनुरागे।
छीतस्वामी गिरधरन श्री विट्ठल,
ओतप्रोत रस पागे ॥२॥
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Saturday, September 1, 2007
Friday, August 17, 2007
नई बात सुन आई....
राग : मल्हार
हों तो एक नई बात सुन आई।
महरि जसोदा ढोटा जायो,
आंगन बजत बधाई ॥१॥
कहिये कहा कहत नहि आवे,
रतन भूमि छबि छाई ।
नाचत बिरध तरुण अरु बालक,
गोरस कीच मचाई ॥२॥
द्वारें भीतर गोप ग्वालन की,
वरनों कहा बढाई ।
सूरदास प्रभु अंतरयामी,
नंदसुवन सुखदाई ॥३॥
Saturday, August 11, 2007
हरियारो सावन आयो...
राग : मल्हार
हरियारो सावन आयो,
देखो माई, हरियारो सावन आयो।
हर्यो टिपारो शीश बिराजत,
काछ हरी मन भायो॥१॥
हरी मुरली है, हरी संग राधे,
हरी भूमि सुखदाई।
हरी हरी वन राजत द्रुमवेली,
न्रुत्यत कुंवर कन्हाई॥२॥
हरी हरी सारी सखीजन पहरे,
चोली हरिरंग भीनी।
रसिक प्रीतम मन हरित भयो है,
सर्वस्व न्योछावर कीनी॥३॥
हरियारो सावन आयो,
देखो माई, हरियारो सावन आयो।
हर्यो टिपारो शीश बिराजत,
काछ हरी मन भायो॥१॥
हरी मुरली है, हरी संग राधे,
हरी भूमि सुखदाई।
हरी हरी वन राजत द्रुमवेली,
न्रुत्यत कुंवर कन्हाई॥२॥
हरी हरी सारी सखीजन पहरे,
चोली हरिरंग भीनी।
रसिक प्रीतम मन हरित भयो है,
सर्वस्व न्योछावर कीनी॥३॥
Sunday, August 5, 2007
हिंडोरे जुलन के दीन आये.....,

राग : मल्हार
जुलन के दीन आये,
हिंडोरे माई जूलन के दीन आये।
गरजत गगन, दामिनी कोंधत,
राग मल्हार जमाये ॥१॥
कंचन खंभ सुढार बनाए,
बीचबीच हीरा लाए ।
डांडी चार सुदेश सुहाई,
चोकी हेम जराये ॥२॥
नाना विधिके कुसुम मनोहर,
मोतीन जुमक छाए ।
मधुर मधुर ध्वनि वेणु बजावत,
दादुर मोर जिवाये ॥३॥
रमकन जमकन पियप्यारीकी,
किंकिणी शब्द सुहाये ।
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरनलाल संग,
मानिनी मंगल गाये ॥४॥
जुलन के दीन आये,
हिंडोरे माई जूलन के दीन आये।
गरजत गगन, दामिनी कोंधत,
राग मल्हार जमाये ॥१॥
कंचन खंभ सुढार बनाए,
बीचबीच हीरा लाए ।
डांडी चार सुदेश सुहाई,
चोकी हेम जराये ॥२॥
नाना विधिके कुसुम मनोहर,
मोतीन जुमक छाए ।
मधुर मधुर ध्वनि वेणु बजावत,
दादुर मोर जिवाये ॥३॥
रमकन जमकन पियप्यारीकी,
किंकिणी शब्द सुहाये ।
चतुर्भुजप्रभु गिरिधरनलाल संग,
मानिनी मंगल गाये ॥४॥
Friday, July 27, 2007
ये बड़भागी मोर...
गोवर्धन पर मुरवा...
राग : मल्हार
गोवर्धन पर मुरवा,
बोले माई, गोवर्धन पर मुरवा,
तेसिये श्यामघन मुरिली बजाई,
तेसेही उठे झुक धुरवा ।१।
बड़ी बड़ी बूंदन बर्खन लाग्यो,
पवन चलत अति जुरवा,
सूरदासप्रभु तिहारे मिलन को,
निस जागत भयो भुरवा ॥२॥
गोवर्धन पर मुरवा,
बोले माई, गोवर्धन पर मुरवा,
तेसिये श्यामघन मुरिली बजाई,
तेसेही उठे झुक धुरवा ।१।
बड़ी बड़ी बूंदन बर्खन लाग्यो,
पवन चलत अति जुरवा,
सूरदासप्रभु तिहारे मिलन को,
निस जागत भयो भुरवा ॥२॥
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सूरदासजी
Thursday, June 21, 2007
वर्षा की अगवानी.....
राग : मल्हार
वर्षा की अगवानी , आये माई वर्षा की अगवानी।
दादुर मोर पपैया बोले, कुंजन बग्पांत उडानी ॥१॥
घनकी गरज सुन, सुधी ना रही कछु,
बदरन देख डरानी ।
वर्षा की अगवानी , आये माई वर्षा की अगवानी।
दादुर मोर पपैया बोले, कुंजन बग्पांत उडानी ॥१॥
घनकी गरज सुन, सुधी ना रही कछु,
बदरन देख डरानी ।
कुम्भनदास प्रभु गोवर्धनधर,
लाल भये सुखदानी ॥२॥
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