राग : टोडी
नाम महिमा ऐसी जु जानो ।
मर्यादादिक कहें लौकिक सुख लहे
पुष्टि कों पुष्टिपथ निश्चे मानो ॥१॥
स्वाति जलबुन्द जब परत हें जाहि में ,
ताहि में होत तेसो जु बानो ।
श्री यमुने कृपा सिंधु जानि स्वाति जल बहु मानि,
सूर गुण पुर कहां लो बखानों ॥२॥
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Tuesday, May 29, 2007
२२) भक्त को सुगम श्री यमुने अगम ओरें....
राग : टोडी
भक्त को सुगम श्री यमुने अगम ओरें ।
प्रात ही न्हात अघजात ताकें सकल
जमहुं रहत ताहि हाथ जोरे ॥१॥
अनुभवि बिना अनुभव कहा जानही
जाको पिया नही चित्त चोरें ।
प्रेम के सिंधु को मरम जान्यो नही,
सूर कहे कहा भयो देह बोरे ॥२॥
भक्त को सुगम श्री यमुने अगम ओरें ।
प्रात ही न्हात अघजात ताकें सकल
जमहुं रहत ताहि हाथ जोरे ॥१॥
अनुभवि बिना अनुभव कहा जानही
जाको पिया नही चित्त चोरें ।
प्रेम के सिंधु को मरम जान्यो नही,
सूर कहे कहा भयो देह बोरे ॥२॥
२३) फल फलित होय फलरूप जाने...
राग : टोडी
फल फलित होय फलरूप जाने ।
देखिहु ना सुनी ताहि की आपुनी,
काहु की बात कहो कैसे जु माने ॥१॥
ताहि के हाथ निर्मोल नग दीजिये,
जोई नीके करि परखि जाने ।
सूर कहें क्रूर तें दूर बसिये सदा,
श्री यमुना जी को नाम लीजे जु छाने ॥२॥
फल फलित होय फलरूप जाने ।
देखिहु ना सुनी ताहि की आपुनी,
काहु की बात कहो कैसे जु माने ॥१॥
ताहि के हाथ निर्मोल नग दीजिये,
जोई नीके करि परखि जाने ।
सूर कहें क्रूर तें दूर बसिये सदा,
श्री यमुना जी को नाम लीजे जु छाने ॥२॥
२४) श्री यमुने पति दास के चिन्ह न्यारे...
राग : टोडी
श्री यमुने पति दास के चिन्ह न्यारे ।
भगवदी को भगवत संग मिलि रहत हैं,
जाके हिय बसत प्राण प्यारे ॥१॥
गूढ यमुने बात सोई अब जानही,
जाके मनमोहन नैनतारे ।
सूर सुख सार निरधार वे पावहीं,
जापर होय श्री वल्लभ कृपा रे ॥२॥
श्री यमुने पति दास के चिन्ह न्यारे ।
भगवदी को भगवत संग मिलि रहत हैं,
जाके हिय बसत प्राण प्यारे ॥१॥
गूढ यमुने बात सोई अब जानही,
जाके मनमोहन नैनतारे ।
सूर सुख सार निरधार वे पावहीं,
जापर होय श्री वल्लभ कृपा रे ॥२॥
Friday, May 11, 2007
गोकुलकी पनिहारी....
राग : टोडी
गोकुलकी पनिहारी पनिया भरण चली , बडे बडे नयना तामें खूब रह्यो कजरा।
पहेरे कसुंभी सारी अंग अंग छबी भारी , गोरी गोरी बहींयनमें मोतीन के गजरा ॥१॥
सखी सब लिए जात हस हस बुजत बात , तनहुकी सुधी भूली सीस धरे गगरा।
नंददास बलीहारी बीच मीले गिरिधारी , नयननकी सेननमें भूल गयी डगरा ॥२॥
गोकुलकी पनिहारी पनिया भरण चली , बडे बडे नयना तामें खूब रह्यो कजरा।
पहेरे कसुंभी सारी अंग अंग छबी भारी , गोरी गोरी बहींयनमें मोतीन के गजरा ॥१॥
सखी सब लिए जात हस हस बुजत बात , तनहुकी सुधी भूली सीस धरे गगरा।
नंददास बलीहारी बीच मीले गिरिधारी , नयननकी सेननमें भूल गयी डगरा ॥२॥
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