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Saturday, September 1, 2007

बादर झूम झूम बरसन लागे.....

राग : मल्हार

बादर झूम झूम बरसन लागे।
दामिनि दमकते, चोंक चमक श्याम,
घन की गरज सुन जागे ॥१॥

गोपी जन द्वारे, ठाडे नारी नर,
भींजत मुख देखन कारन अनुरागे।
छीतस्वामी गिरधरन श्री विट्ठल,
ओतप्रोत रस पागे ॥२॥

Saturday, August 11, 2007

हरियारो सावन आयो...

राग : मल्हार

हरियारो सावन आयो,
देखो माई, हरियारो सावन आयो।
हर्यो टिपारो शीश बिराजत,
काछ हरी मन भायो॥१॥

हरी मुरली है, हरी संग राधे,
हरी भूमि सुखदाई।
हरी हरी वन राजत द्रुमवेली,
न्रुत्यत कुंवर कन्हाई॥२॥

हरी हरी सारी सखीजन पहरे,
चोली हरिरंग भीनी।
रसिक प्रीतम मन हरित भयो है,
सर्वस्व न्योछावर कीनी॥३॥

Friday, July 27, 2007

ये बड़भागी मोर...


राग : मल्हार
ये बड़भागी मोर,
देखो माई, ये बड़भागी मोर।
जीनकी पंखको मुकुट बनत है,
सीर धरे नंदकिशोर ॥१॥

ये बड़भागी नन्द जशोदा,
पुण्य किये भरी जोर ।
वृन्दावन हम क्यों ना भये,
लागत पग की कोर ॥२॥

ब्रह्मादिक सनकादिक नारद,
ठाडे है कर जोर ।
सूरदास संतनको सरवस,
देखियत माखनचोर ॥३॥

गोवर्धन पर मुरवा...

राग : मल्हार

गोवर्धन पर मुरवा,
बोले माई, गोवर्धन पर मुरवा,
तेसिये श्यामघन मुरिली बजाई,
तेसेही उठे झुक धुरवा ।१।

बड़ी बड़ी बूंदन बर्खन लाग्यो,
पवन चलत अति जुरवा,
सूरदासप्रभु तिहारे मिलन को,
निस जागत भयो भुरवा ॥२॥

Thursday, June 21, 2007

वर्षा की अगवानी.....

राग : मल्हार
वर्षा की अगवानी , आये माई वर्षा की अगवानी।
दादुर मोर पपैया बोले, कुंजन बग्पांत उडानी ॥१॥

घनकी गरज सुन, सुधी ना रही कछु,
बदरन देख डरानी ।

कुम्भनदास प्रभु गोवर्धनधर,
लाल
भये सुखदानी ॥२॥