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Wednesday, August 10, 2011

राग : मालकोंस

प्रात:  समय हरी नाम लीजिये, आनंद मंगल में दिन जाय
चक्रपाणी करुणामय केशव विघ्न विनाशन यादावराय .. १ .. 

कलिमल हरण तरण भवसागर भक्त चिंतामणि कामधेनु 
ऐसो समर्थ नाम हरी को वंदनिक पावन पद रेनू  .. २ ..

शिव विरंची इन्द्रादि देवता मुनिजन करत नाम की आस 
भक्त वत्सल हरिनाम कल्पतरु वरदायक पर्मनानंददास .. ३ .. 

Saturday, September 15, 2007

कहन लागे मोहन मैया मैया....

राग : नट

कहन लागे मोहन मैया मैया।
बावा बावा नंदरायसो,
अरु हलधरसो भैया भैया॥१॥

छगन मगन मधुसुदन माधो,
सब व्रज लेत बलैया।
नाचत मोर रहत संग उनके,
तोतरे बोल बुलैया॥२॥

दुरी खेलन जिन जाऊ मनोहर,
मारेगी कहुकी गैया।
मात यशोदा ठाड़ी टेरे,
ले ले नाम कन्हैया॥३॥

सब गोकुलमें आनंद उपज्यो,
घर घर होत बधैया।
नंदनंदंकी या छबि ऊपर,
परमानंद बलि जैया॥४॥

Sunday, September 9, 2007

वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ.....

राग : आसावरी

वारि मेरे लटकन पग धरो छतियाँ ।
कमलनयन बलि जाऊ वदनकी,
शोभित नेन्ही नेन्ही दूधकी द्वे दतियाँ॥१॥

यह मेरी यह तेरी यह बाबा नन्दजूकी,
यह बलभद्र भैया की।
यह ताकि जो झूलावे तेरो पलना॥
ईंहां ते चली खुर खात पीवत जल,
परिहरो रुदन हसो मेरे ललना॥२॥

रुनक झूनक बाजत पैजनियाँ,
अलबल कलबल, बोलो मृदु बनियाँ।
परमानंद प्रभु त्रिभुवन ठाकुर,
जाय झूलावे बाबा नंद्जू की रनियाँ॥३॥

Sunday, August 26, 2007

रक्षा बंधन को दिन आयो....

राग : सारंग

रक्षा बंधन को दिन आयो।
गर्गादि सब देव बुलाये,
लालहिं तिलक बनायो॥१॥

सब गुरुजन मिल देत असीस,
चिरंजीयो ब्रजरायो।
बाढो प्रताप नित या ढोटा को,
परमानंद जस गायो॥२॥

पवित्रा पहरे परमानंद....

राग : सारंग

पवित्रा पहरे परमानंद।
श्रावन सुदी एकादशी के दिन,
गिरिधर परमानंद॥१॥

श्री वृषभाननंदिनी निजकर,
ग्रथित विविध पटभांत।
ता मध्य सुभग सुवर्ण सुत्रसो,
पोई नवमती जात॥२॥

पवित्रा पहरे हिंडोरे जुलत,
दोउ आनंद कंद।
जमुना पुलिनमें कुंज मनोहर,
गावत परमानंद॥३॥

Saturday, August 18, 2007

ग्वाल देत है हेरी घर घर....

राग : सारंग

घर घर ग्वाल देत है हेरी।
बाजत ताल मृदुंग बाँसुरी,
ढोल दमामा भेरी ॥१॥

लूटत झपट्त खात मिठाई,
कही ना सकत कोऊ फेरी।
उन्मद ग्वाल करत कोलाहल,
व्रज वनिता सब घेरी॥२॥

ध्वजा पताका तोरनमाला,
सबे सिंगारी सेरी।
जय जय कृष्ण कहत परमानंद,
प्रगट्यो कंसको वेरी॥३॥

Wednesday, July 11, 2007

कमल मुख देखत.....

राग : सुहो

कमल मुख देखत, तृप्त ना होय ।
यह सुख कहा दुहागीन जाने, रही निसाभर सोय ॥ १॥

ज्यों चकोर चाहत उडुराजे, चंद वदन रही जोय ।
नेक अकोर देत नही राधा, चाहत पीयरी निचोय ॥ २॥

उन् तो अपनों सर्वस्व दीनो, एक प्राण वपु दोय ।
भजन भेद न्यारो परमानन्द, जानत विरला कोय ॥ ३॥

Saturday, May 12, 2007

३७) श्री यमुने की आस अब....

राग : कल्याण

श्री यमुने की आस अब करत है दास ।
मन कर्म बचन, कर जोरिके मांगत,
निशदिन रखिये अपने जु पास ॥१॥

जहाँ पिय रसिकवर, रसिकनी राधिका,
दोउ जन संग मिलि, करत है रास।
दास परमानंद, पाये अब ब्रजचंद,
देखी सिराने नैन मंदाहास ॥२॥

३८) श्री यमुने के साथ अब....

राग : कल्याण

श्री यमुने के साथ अब फ़िरत है नाथ ।
भक्त के मन के, मनोरथ पूरन करत ,
कहां लो कहिये इनकी जु गाथ ॥१॥

विविध सिंगार, आभूषन पहरे,
अंग अंग शोभा वरनी न जात ।
दास परमानंद पाये अब ब्रजचन्द
राखे अपने शरण बहे जु जात ॥२॥

३९) श्री यमुने पिय को....

राग : कल्याण

श्री यमुने पिय को बस तुमजु कीने ।
प्रेम के फंदते, गहिजु राखे निकट ,
ऐसे निर्मोल नग मोल लीने ॥१॥

तुमजु पठावत, तहां अब धावत
तिहारे रसरंग में, रहत भीने ।
दास परमानंद, पाये अब ब्रजचंद,
परम उदार श्री यमुनेजु दान दीने ॥२॥

४०) श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके...

राग : कल्याण

श्री यमुने सुखकारनी प्राण प्रतिके ।
जिन्हे भूलि जात पिय, तिने सुधि करि देत,
कहाँलों कहिये इनके जु हित के ॥१॥

पिय संग गान करे, उमंगी जो रस भरे,
देत तारी कर लेत झटके ।
दास परमानंद, पाये अब ब्रजचंद
येहि जानत सब प्रेम गति के ॥२॥

Friday, May 11, 2007

श्याम कहा चाहतसे डोलत

राग : बिलावल

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श्याम कहा चाहतसे डोलत ।
बूजे हुते वदन दूरावत , सुधे बोल ना बोलत ॥१॥

सुने निपट अंधीयारे मंदिर, दधी भाजनमें हाथ ।
अब काहे तुम उत्तर कर हो, कोऊ संग ना साथ ॥२॥

मैं जान्यो यह मेरो घर है , तिही धोखे में आयो ।
देखतही गोरस में चेंटी , काढ्नको कर नायो ॥३॥

सुनत चतुर वचन मोहनके , ग्वालिनी मूर मुस्कानी ।
परमानंद्प्रभू हो रतीनागर , सबे बात हम जानी ॥४॥