राग : गौड सारंग
रास रससागर, श्री यमुने जु जानी ।
बहत धारा तन प्रतिछन नूतन,
राखत अपने उर मां जु ठानी ॥१॥
भक्त को सहि भार हेतु जो प्रान आधार,
अति हि बोलत मधुर मधुर बानी ।
श्री विट्ठल गिरिधरन बस किये,
कौन पें जात महिमा बखानी ॥२॥
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Wednesday, May 16, 2007
३०) भक्त प्रतिपाल जंजाल टारे....
राग : गौड सारंग
भक्त प्रतिपाल जंजाल टारे ।
अपने रस रंग मे, संग राखत सदा,
सर्वदा जोइ श्री यमुने नाम उच्चारे ॥१॥
इनकी कृपा अब, कहाँ लग बरनिये,
जैसे राखत जननी पुत्र बारे ।
श्री विट्ठल गिरिधरन संग विहरत,
भक्त को एक छीनू ना बिसारे ॥२॥
भक्त प्रतिपाल जंजाल टारे ।
अपने रस रंग मे, संग राखत सदा,
सर्वदा जोइ श्री यमुने नाम उच्चारे ॥१॥
इनकी कृपा अब, कहाँ लग बरनिये,
जैसे राखत जननी पुत्र बारे ।
श्री विट्ठल गिरिधरन संग विहरत,
भक्त को एक छीनू ना बिसारे ॥२॥
३१) श्री यमुना जी को नाम ले सोई सुभागी...
राग : गौड सारंग
श्री यमुना जी को नाम ले सोई सुभागी ।
इनके स्वरूप को, सदा चिंतन करत,
कल न परत जाय नेह लागी ॥१॥
पुष्टि मारग धरम, अति दुर्लभ करम,
छांड सगरे परम, प्रेम पागी।
श्री विट्ठल गिरिधरन ऐसी निधि,
भक्त को देत है बिना माँगी ॥२॥
श्री यमुना जी को नाम ले सोई सुभागी ।
इनके स्वरूप को, सदा चिंतन करत,
कल न परत जाय नेह लागी ॥१॥
पुष्टि मारग धरम, अति दुर्लभ करम,
छांड सगरे परम, प्रेम पागी।
श्री विट्ठल गिरिधरन ऐसी निधि,
भक्त को देत है बिना माँगी ॥२॥
३२) कौन पे जात श्री यमुने जु बरनी....
राग : गौड सारंग
कौन पे जात श्री यमुने जु बरनी ।
सबही को मन, मोहत मोहन ,
सो पिया को मन है जु हरनी ॥१॥
इन बिना एक छिन, रहत नही जीवन धन,
ब्रज चन्द मन, आनंद करनी ।
श्री विठ्ठल गिरिधरन संग आये,
भक्त के हेत अवतार धरनी ॥२॥
कौन पे जात श्री यमुने जु बरनी ।
सबही को मन, मोहत मोहन ,
सो पिया को मन है जु हरनी ॥१॥
इन बिना एक छिन, रहत नही जीवन धन,
ब्रज चन्द मन, आनंद करनी ।
श्री विठ्ठल गिरिधरन संग आये,
भक्त के हेत अवतार धरनी ॥२॥
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